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Sanghiji Jain Mandir Sanganer (सांघी जी मन्दिर) Sanghijikamandir.com Jaipur – Shri Digamber Jain Atishaya Kshetra Temple



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कलश आवंटन समिति संपर्क सूत्र

07014865774 , 7014311036

कलश की जानकारी

महत्वपूर्ण सूचना कृपया ध्यान देवें दिनांक 19 एवं 20 के लिए स्वस्ति कलश, परमेष्ठी कलश एवं मंगल कलश की बुकिंग न करें । इन कलशों द्वारा अभिषेक दिनांक 21 से ही प्रारंभ किया जाएगा ।

सहयोग कलश का नाम सुविधाएं
सुरक्षित आचार्य विद्यासागर स्वर्ण कलश सुरक्षित
100 कलश 11 श्रीफल मुनि पुंगव श्री सुधासागर रिद्धि सिद्धि कलश 5 कमरे 7 दिन आवास 21 व्यक्ति
51 कलश 51 श्रीफल आदीश्वर ब्रह्म कलश 3 कमरे 7 दिन आवास 11 व्यक्ति
21 कलश 21 श्रीफल सर्वोदय तीर्थ कलश 2 कमरे 3 दिन आवास 5 व्यक्ति
11 कलश 11 श्रीफल सर्वार्थ अमृत सिद्धि कलश 1 कमरा 1 दिन आवास 5 व्यक्ति
5 कलश 51 श्रीफल अमृत सिद्धि कलश 1 कमरा 1 दिन आवास 3 व्यक्ति
1 कलश 11 श्रीफल सर्वार्थ कलश 1 कमरा 1 दिन आवास 2 व्यक्ति
51 श्रीफल सर्व औषधि कलश आवास सुविधा सशुल्क 1 व्यक्ति कलश करेगा
21 श्रीफल स्वस्ति कलश आवास सुविधा सशुल्क 1 व्यक्ति कलश करेगा
11 श्रीफल सर्व मंगल कलश आवास सुविधा सशुल्क 1 व्यक्ति कलश करेगा
5100/- पंच परमेष्ठी कलश आवास सुविधा सशुल्क 1 व्यक्ति कलश करेगा

 

 

हजारों साल की ऐतिहासिकता का साक्षी यह भूगर्भ स्थित जिनालय है । इसमें से अभी तक जितनी प्रतिमाएं निकाली गई हैं उनमें किसी पर भी प्रशस्ति नही है । मात्रा एक प्रतिमा पर संवत 7 उत्कीर्ण है । पूर्वकथित तल्ले वाले मंदिर का नाम तो कथन परंपरा में है , लेकिन कहीं भी किसी भी लेखक ने इस चैत्यालय एवं जिन बिम्बों का उल्लेख नही किया । हो सकता है इस जिनालय को संघी जी ने उस प्राचीन तल्ले वाले मंदिर के तल्ले को बंद करके ऊपर वह विशाल मंदिर बना दिया हो । जो कुछ भी हो , इसके ऐतिहासिकता इतिहास के गर्भ से अभी तक प्रसूत नही हुई , जनश्रुति का जरूर विषय बना रहा ।

20 वीं सदी की प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती परम पूज्य आचार्य शांतिसागर महाराज का संघ सहित यहां पदार्पण सन 1933 की मंगसिर बदी तेरस को हुआ । आचार्य शांतिसागर जी महाराज ने आदिनाथ बाबा के दर्शन कर अलौकिक शांति का अनुभव किया तथा कहा कि यह चतुर्थकालीन महा अतिशयकारी प्रतिमा है । आप लोग इस मंदिर का जीर्णोद्धार करो, पूजन पाठ कर जीवन को धन्य बनाओ ।

एक दिन सांगानेर के किसी वृद्ध ने महाराज से कहा कि महाराज इस मंदिर के नीचे कोई तलघर हैं तथा उनमें रत्नमयी जिन प्रतिमाएं हैं , ऐसा हमारी पूर्वज कहा करते थे। महाराज ने कहा कि ऐसी बातों पर अधिक विश्वास नही करना चाहिए । लेकिन आकस्मिक रूप से उसी रात्री को ब्रह्म मुर्हूत में यक्ष ने महाराज को स्वप्न दिया । प्रातःकाल उठकर महाराज ने कहा कि आप लोगों द्वारा कही गयी जनश्रुति झूठी नही है , मुझे स्वप्न में भूगर्भ स्थित जिनालय के दर्शन हुए हैं । तदनुसार महाराज ने पूजा वाले कमरे में गुफाद्वार पर कुछ दिन तक जाप किया । मंगसिर सऊदी दशमी को प्रातःकाल 7:30 बजे गुफा में अकेले ही प्रवेश किया । 20 से 25 मिनट बाद महाराज श्री सम्पूर्ण चैत्यालय को लेकर गुफा द्वार पर आ गए । बड़ी तादाद में बाहर मंडप में जन समूह एकत्रित था सैकड़ों कलशों से अभिषेक हुआ ।

उस समय आचार्य शांतिसागर जी महाराज ने अपनी उपदेश में कहा कि यह मंदिर सात मंजिला है । पांच मंजिला नीचे है और दो मंजिला ऊपर है । अंतिम दो तल्लों में कोई नहीं जा सकता है । मध्य की पांच मंजिल में यह अलौकिक रत्नमयी चैत्यालय विराजमान है। उस समय जनता ने पहली बार दर्शन किये थे ।

उसके बाद अनेक आचार्य मुनि पधारे लेकिन चैत्यालय निकालने का निमित्त नही बन पाया । 38 साल बाद जून सन 1971 में आचार्य देशभूषण जी महाराज ने इस चैत्यालय को तीन दिन के लिए निकाला । बड़ी धर्म प्रभावना हुई ।संकल्पानुसार चैत्यालय को भूगर्भ में विराजमान करने में देर हो गई । समय पूर्ण होते ही चारों तरफ गुफा से लेकर स्टेज तक असंख्यात कीड़े मंदिर में , पांडाल में भर गए । आचार्य महाराज ने बताया हमने चैत्यालय वापिस विराजमान करने का समय 8 बजे का दिया था अब 10 बज गए हैं इसीलिए उपसर्ग हो रहा है ।

इसके बाद सन 1987 में आचार्य विमलसागर जी महाराज ने तथा 10 मई सन 1992 ई को आचार्य कुंथुसागर जी महाराज ने इस भव्य एवं अलौकिक चैत्यालय के जनता को दर्शन कराए ।

इसके बाद इस युग के महातपस्वी संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य , तीर्थ क्षेत्र उद्धारक , आद्यात्मिक संत मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ का पदार्पण सांगानेर में हुआ । मुनि श्री कुछ घंटों का विचार करके ही यहां आए थे लेकिन भगवान आदिनाथ की प्रतिमा को देखकर बहुत ही आनंदित हुए । सारे मुनि संघ को अलौकिक शांति मिली । अतः पूरा मुनि संघ 46 दिन तक यहां रुका । बहुत धर्म प्राभावना हुई । मुनि श्री अपने प्रवचन में इस क्षेत्र की महिमा का वर्णन करते थे ।

मुनि श्री वास्तुशास्त्र के ज्ञाता हैं । अतः इस संघी जी के मंदिर के वास्तु दोष हटाकर जीर्णोद्धार की प्रेरणा दी । तदनुसार जीर्णोद्धार हुआ तथा मंदिर को नया भव्य रूप भी दिया जा रहा है । मुनि श्री के बताए अनुसार वास्तुदोष हटने के बाद तो यह क्षेत्र दिन दूना रात चौगुना लोगों की श्रद्धा का केंद्र बनता गया । नाना प्रकार के अतिषयों से लोग लाभान्वित होने लगे ।

दिनांक 12 जून को समाज एवं कमेटी के विशेष आग्रह पर मुनि श्री प्रातः काल भूगर्भ स्थित यक्ष रक्षित चैत्यालय को तीन दिन के लिए निकाल कर लाये । मुनि श्री ने प्रवेश करने से पहले सारे नियमों की जानकारी की । आचार्य शांतिसागर जी महाराज के बताए सारे नियमों को अच्छी तरंग जान लेने के बाद ही चैत्यालय निकालने का आशीर्वाद दिया । उन्ही नियमों को गुरु आज्ञा मानकर , स्वीकार कर, गुफा में प्रवेश किया । प्रवेश करने के पूर्व आपने सात दिन तक ब्रह्म मुर्हूत में गुफा के द्वार पर बैठ कर जाप किया । सातवें दिन 7:30 बजे आपने गुफा में प्रवेश किया । एक घंटे गुफा में रहने के बाद मुनि श्री प्रसन्न मुद्रा में चैत्यालाय लेकर गुफा के बाहर आये । चारों ओर जय जयकार से आकाश गुंजायमान हो गया ।

इस बार पुनः 18 साल के बाद परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम आशीर्वाद से जगत पूज्य तीर्थ जीर्णोद्धारक वास्तुविज्ञ महा अतिशयकारी मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के द्वारा भूगर्भ से अति प्राचीन यक्ष रक्षित जिन चैत्यालय निकाला जाएगा । जिसकी घोषणा पूज्य मुनि श्री द्वारा 26 मई 2017 को सांगानेर के आदिनाथ बाबा के चरणों मे की गई ।

इस चैत्यालय के निकालने की तिथि पूज्य मुनि श्री द्वारा 19 जून से 25 जून 2017 तक रखी गई है । आप भी इस महान अतिशय का पुण्य लाभ लेकर अपने जीवन को धन्य करें ।

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History of Bhugarbh Chaityalaya

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